उससे इंटरनेट पर मिलो

कबीरा खडा बाज़ार में ..... उसके हाथ की लिखी बरसों हुए कोई चिट्ठी नहीं मिली नाज़ुक अँगुलियाँ नेल पॉलिश के बिना गुलाबी नाखून सिंदूरी हथेलियों से शुरु होती उसकी लरजती देह की कल्पना किये बरसों बीत गये पप्पी वह भी यदाकदा मोबाइल पर लो-दो उससे मिलना है, तो इंटरनेट पर मिलो एक औरत को और... [पूरी पोस्ट]
writer sareetha
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[07 Nov 2009 10:10 AM]

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