अपनापन नहीं मिलता
न जिसके बीच हो दीवार वह आँगन नहीं मिलता; कहीं अब ज़िन्दगी नज़रों में अपनापन नहीं मिलता। जिसे हम ओढ़ कर कुछ देर अपने दुःख भुला देते, बुना हो प्यार के धागों से वह दामन नहीं मिलता। जहाँ जज्बात की इक आग हरदम जलती रहती थी, दिलों में अब वो जज्बा वह दिवानाप...
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chandrabhan bhardwaj
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[07 Nov 2009 04:59 AM]



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