कितना भी लिखो कम पड़ ही जाएगा
भोपाल। वे क्या थे इस बारे में कुछ भी लिखना सूरज को रौशनी दिखने के बराबर ही है। में पत्रकारिता के क्षेत्र में नया हूँ और मात्र १० वर्ष में प्रभाष जे बारे में उनके नाम को जानने तक सीमित हूँ। अब वे नहीं हैं लेकिन हमारी कलम में रहेंगे। अनगिनत पत्रकार जो...
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भीमसिंह मीणा
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[07 Nov 2009 04:21 AM]



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