फ़ूको बनाम चॉम्सकी

निर्मल-आनन्द फ़ूको : बजाय सामाजिक संघर्षों को ‘न्याय’ की दृष्टि से समझने के, हमें न्याय को सामाजिक संघर्ष के नज़रिये से देखना चाहिये .. .. सर्वहारा शासक वर्ग के खिलाफ़ इसलिए युद्ध नहीं छेड़ता क्योंकि ये एक इंसाफ़ की लड़ाई है। सवर्हारा शासक वर्ग के विरुद्ध युद्ध करता है... [पूरी पोस्ट]
writer अभय तिवारी
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[07 Nov 2009 02:24 AM]

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