आज मे बीतता हुआ कल- प्रभाष जोशी

बजार उन्हें युगपुरुष कहना कोई अतिशयोक्ति नही होगी। एक बार उन्होंने ही कहा था कि अखबार कल का इतिहास बनाता है। बीते हुए कल का। उनकी ये बात कोई नई नही है। अखबार का चरित्र ही कुछ ऐसा है। लेकिन अखबार का एक और चरित्र होता है। एक अनोखा रूप, रंग, भाषा, संवाद शैली... [पूरी पोस्ट]
writer राहुल

प्रभाष जी

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[07 Nov 2009 00:30 AM]

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