प्रभाष जोशी हिंदी के अंतिम समर्पित सेनानी

फिलहाल आज सवेरे हिंदुस्तान दैनिक के पहले पृष्ठ पर सूचना देखी तो सन्न रह गया प्रभाष जी चुपके से निकल गए। मुझसे एक साल छोटे थे। पहले मैं उन्हें अपने से बड़ा ही समझता था। जब यह राज़ खुला कि मैं उनसे एक साल बड़ा हूं तो वे बोले अब मैं तुम्हें प्रणाम किया करूंगा।... [पूरी पोस्ट]
writer गिरिराज किशोर
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[06 Nov 2009 10:36 AM]

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