आपका प्रेम है कि आपने मुझे अपना मान लिया

उन्मुक्त इस चिट्ठी में कन्याकुमारी में घूमने की जगहों का वर्णन है। कहा जाता है जिस चट्टान पर एक टांग से खड़े होकर  कुमारी कन्या ने अपनी पूजा की,  वहां पर उसका एक निशान बना हुआ है। स्वामी विवेकानंद उस निशान को देखने के लिए वहां गये जिससे  उन्हें... [पूरी पोस्ट]
writer उन्मुक्त

यात्रा विवरण

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[06 Nov 2009 09:45 AM]

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