डेढ़ घंटे की मुलाक़ात

अमृता प्रीतम की याद में..... अमृता की कवितायेँ खुद में एक कहानी है ,एक एक लफ्ज़ अपनी बात इस तरह से कहता है जैसे ज़िन्दगी का एक सच मुकम्मल रूप से सच है ..और हर बार उनका लिखा कोई न कोई नया अर्थ दे जाता है ...आज इसी श्रृंखला में उनकी एक और कविता . .डेढ़ घंटे की मुलाकात ..जैसे ज़िन्... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना [रंजू भाटिया]
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[06 Nov 2009 06:47 AM]

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