मेरा अनोखा सपना

बातें जो छूट गईं नागार्जुन की कविता आज सुबह से खूब याद आ रही है, चंदू मैंने सपना देखा. पहली बार में इस कविता का मतलब समझ नहीं पाई थी. बस तुकबंदी देखकर यह लगा था कि एनसीआरटी की किसी किताब की कोई कविता है. खैर हुआ यह कि रात को एक अजब सा सपना मुझे आया, जो इस कविता की तर... [पूरी पोस्ट]
writer aneeta
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[06 Nov 2009 06:26 AM]

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