कुछ ज्ञात कुछ अज्ञात
उन्होने चुपके से ज़हर पिला दिया " गरज़ पड़ी न थी कि फिर से बुला लिया, इस्तेमाल किया और भुला दिया । दवा-दारू से काम चला नहीं जब, उन्होने चुपके से ज़हर पिला दिया । वक्त आया था जिंदगी जीने का जब, खुदा ने चैन की नींद सुला दिया । हमारी हस्ती ही क्या है खुल के...
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©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
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[06 Nov 2009 05:29 AM]



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