प्रभाष जोशीः अब के सवनवां बहुरि नहि अइहैं...

ख्वाब का दर यह कहने का कोई मतलब नहीं कि तुम समय के साथ चल रहे हो सवाल यह है कि समय तुम्हें बदल रहा है या तुम समय को बदल रहे हो? लोग वक्त के साथ चलने के लिए दिन-रात भागा-दौड़ी कर रहे हैं...कहीं मिसफिट न हो जाएं, लोग आउटडेटेड न कहने लगें इसलिए वे समय के साथ कदम ता... [पूरी पोस्ट]
writer Pankaj Parashar

प्रभाष जोशी

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[06 Nov 2009 05:29 AM]

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