चले गये दद्दा...
हिन्दी पत्रकारिता के पितामह प्रभाष जोशी हमारे बीच में नहीं है.................. खबर सुनते ही लगा कि धरती डोलने लगी...भूकंप आ गया....ऐसा लगा कि हिन्दी पत्रकारिता अब खत्म हो गयी..... इलाहाबाद से दिल्ली चला था तो एक इच्छा थी कि लेखनी के इस दद्दा से मिलू...
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Vivek Kumar "विवेक"
प्रभाष जोशी
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[06 Nov 2009 01:48 AM]



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