अमर प्रभाष जोशी

बतंगड़ इलाहाबाद में हूं और खबरों से कटा हुआ हूं इसलिए अभी थोड़ी देर पहले प्रभाष जी के न रहने की खबर पता चली। जीवन रहते निजी मुलाकात का कभी मौका नहीं लगा था। लेकिन, ये खबर पता चली तो, लगा जैसे कुछ शून्य सा हो गया हो हिंदी पत्रकारिता में कौन भरेगा इस शून्य को... [पूरी पोस्ट]
writer हर्षवर्धन

प्रभाष जोशी

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[06 Nov 2009 00:02 AM]

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