'नेताजी' की नजर...ये इंसान नहीं हैं...

बेबाक टिप्पणी महज एक वोट से सरकार बनती और गिर जाती है। चुनाव से सरकार बनने तक राज्य हो या केन्द्र दोनों को जनता की याद पल-पल आती है। इस समय तक हर नेता खुद को आम आदमी समझता है। चुनावी दौरे पर कभी वह किसी झोपड़ी में गरीब के साथ चाय की चुस्की लेते देखा जाता है तो कभी... [पूरी पोस्ट]
writer रविकांत प्रसाद
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[05 Nov 2009 16:13 PM]

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