कब सोचा था
कब सोचा था इतना सब कुछ कर जायेगी गाय विदेशी अक्ल हमारी चर जायेगी उम्मीदें नाकाम तमन्ना मर जायेगी इसकी जिम्मेदारी किसके सर जायेगी चट्टानी लहरें हद पार गुज़र जायेगी कश्ती मेरी फ़िर भी पार उतर जायेगी यूँ तो महफ़िल में हर ओर नज़र जायेगी उनको देखा तो फ़िर वही...
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jogeshwar garg
ghazal
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[05 Nov 2009 13:29 PM]



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