दर्द

एक बूँद दर्द दुनिया से अनचाहे मिलते रहे, हम तोहफे समझ अपनाते रहे. हमदर्द कुछ बांटने को आये दर्द, (तो) मुस्कुराहटों में आँसू छिपाते रहे. मुश्किलों ने बार बार दस्तक दी, उन्ही से दरो दीवार सजाते रहे. जो आँसूओं पर भी लग गए पहरे, शब्द समेटने में रातें बिताते रहे.... [पूरी पोस्ट]
writer pooja
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[05 Nov 2009 11:34 AM]

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