हँस के गुजार दी कभी रो के गुजार दी
हँस के गुजार दी कभी रो के गुजार दी जिंदगी हमने तेरे,होके गुजार दी तुझको यकीन हो ना हो , लेकिन है सच यही हमने तो अपनी जिंदगी तुझपर निसार दी इश्क में तूफ़ान आना, लाज़मी, मालूम था कश्ती समंदर में तिरे भरोसे उतार दी चाँद तारों की तमन्ना की नहीं तेरे सिवा...
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योगेश स्वप्न
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[05 Nov 2009 10:41 AM]



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