प्रलय तांडव !

सागरिका धरती कराह रही थी बूँद बूँद के लिए तरस रही थी उसकी छाती फट गई थी और वह बंजर बन गई थी सभी वैज्ञानिक मिल गए मेघमंथन करने के लिए पंडित पादरी जुट गए वरुण देव को प्रसन्न करने के लिए पता नहीं भयभीत वरुण देव किस कोने में जा बैठे बच्चे बूढे सभी पानी के लिए तर... [पूरी पोस्ट]
writer गुर्रमकोंडा नीरजा
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[05 Nov 2009 07:52 AM]

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