माँ !

सागरिका माँ ! नौ महीने कोख में अपने रक्त मांस से सींचकर मुझे जन्म दिया है और अपनी छाती को चीरकर दूध पिलाया है रात भर अपलक जागती रही हर पल हर लम्हा मेरे बारे में सोचती रही ख़ुद तो कष्ट झेलती रही कंटीली राह पर चलती रही पर मेरी खुशी के लिए भगवान से हर पल याचना... [पूरी पोस्ट]
writer गुर्रमकोंडा नीरजा
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[05 Nov 2009 07:17 AM]

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