सोने दे मुझे शब भर को
सोने दे मुझे शब भर को कितनी है कीमत अपनों की आराम की कीमत कितनी है आँसू न कर पाये कीमत उधड़ा है जिगर सिलाई की कीमत कितनी है सब्र कितने वक्त का , ये बता ये सफर है या मुकाम आड़े वक्त के साथी , क्या यही है मेरा ईनाम सोने दे मुझे शब भर को poems...
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शारदा अरोरा
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[04 Nov 2009 13:08 PM]



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