क्या बताऊं
क्या बताऊं इन आंखों ने क्या मंज़र देखा धरती के सीने में उतरता खंजर देखा जिस धऱती पे थे उगते फूल शफ़ा के उस धरती पे लहू का समंदर देखा क्या पूछते हो, क्यूं आंखें नम हैं उस समंदर को भीतर उफनते देखा दिल से हल्की सी इक आह निकली आह को बवंडर में बदलते देखा...
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vijaymaudgill
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[04 Nov 2009 12:26 PM]



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