ये दो भारतों के बीच के तीसरे भारत की लड़कियाँ

Beyond The Second Sex (स्त्रीविमर्श) वह कहीं भी हो सकती है! यह कहानी शुरू होती है गुज़री सदी के आखि़री हिस्से से जब निराला की प्रिया किसी अतीत की वासिनी हो गई थी और प्रसाद की नायिकाएँ अपनी उदात्तता, भव्यता, करुणा और विडंबना में किसी सुदूर विगत और किसी बहुत दूर के भविष्य का स्वप्न बन गई थ... [पूरी पोस्ट]
writer कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
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[04 Nov 2009 10:51 AM]

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