बेवकूफ लड़कियां..नींद की कड़कियां
लग रहा है कि बहुत सालों बाद इस ब्लॉग पर कुछ डाल रहा हूँ. वैसे मेरा ही लफ्जों का खेल वाला ब्लॉग तो हमेशा ही अद्यतन होता रहता है.. और कल ही यहाँ पर भी कुछ डाला है.. पर मेरा खुद का ब्लॉग ही सूना पड़ा है.. तो आज इसका रुदन दिल तक पहुंचा और मैं आ गया फिर स...
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Pratik Maheshwari
मैं और जिंदगी...
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[04 Nov 2009 10:19 AM]



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