दुःख का अधिकार

सोचा ना था.... आज एक पाठ पढ़ा रही थी......"दुःख का अधिकार"......इसमे लेखक यशपाल जी ने कितनी आसानी से समाज में होने वाले भेदभाव को दर्शाया है.......एक गरीब बूढी औरत को अपने बेटे की मृत्यु के अगले ही दिन अपने पोते और बीमार बहु का पेट पालने के लिए खरबूजे बेचने आना पड़त... [पूरी पोस्ट]
writer Neha
views
22
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
3
[04 Nov 2009 09:40 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix