अजय पोहनकर-बागेश्री-सखी मन लागे ना

सरगम राग बागेश्री कई दिनों से अलग अलग आवाज़ों में सुन रही हूँ ....बार -बार यही ख़्याल आता है - जो कोई हूक हो "जी" में तो गूँज उठ्ठेंगे .. ये बिरही सुर कोशिशों से साधे नहीं जाते.... ******** ***** **** *** ** * सुनें राग बागेश्री में प्रारम्भिक आलाप के बाद द... [पूरी पोस्ट]
writer पारूल
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[04 Nov 2009 09:33 AM]

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