आंच

खामोश पहलू ... दहकती शब के दामन में उस रोज़ तेरी साँसों से जब टकराई थी मेरी सांसें सरगोशियों की लवों से जब हमने उजली की थी रात की हथेली उस तवील लम्स के दौरां रफ्ता-रफ्ता उठती तपिश ने जलाई थी कुछ तेरे भीतर कुछ मेरे भीतर की चिंगारी उस रात आखिर बार जिन बुझते रिश्तों क... [पूरी पोस्ट]
writer केतन कनौजिया 'शाइर'
views
20
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
3
[04 Nov 2009 06:00 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix