साथी हमें अलग होना है...
ज़िन्दगी ज्यादातर गर्मियों की उमस भरी रात की तरह ही रहती है। कोई हरकत नही,कोई बरकत नही। ऐसे में हवा का एक झोंका भी बड़ी राहतें लेकर आता है। राहत से भी कुछ ज्यादा। बहुत ज्यादा। ये झोंका बिल्कुल ताज़ा है। भोपाल में पत्रकारिता विश्वविद्यालय के अन्दर-बाहर...
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हिमांशु बाजपेयी
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[04 Nov 2009 03:42 AM]



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