जन्मों तेरा ही नाम लिया है
जन्मों तेरा ही नाम लिया है मैंने जां, तब तेरी उल्फ़त को जिया है मैंने ज़िंदा रहे ये रूह तेरे आने तक बस इसलिए घावों को सिया है मैंने ये तिश्नगी शादाब रहे, इस खातिर सावन कई, आँखों से पिया है मैंने आकर मुझे जो आज छुआ है तुमने ख़्वाबों को फिर से पंख दिया ह...
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प्रताप नारायण सिंह
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[04 Nov 2009 01:30 AM]



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