कोशिश – राहुल कात्यायन
बरसों से बिना बात जिससे रूठा रहा, उस मुस्कराहट को
खींच कर होठों पे लाने की ये कोशिश है
सम्मान मैं इतने झुके कि कायरी का भरम देने लगे
उस सर को, इज्ज़त से उठाने की ये कोशिश है
बरसों बंधा पड़ा था कई अँधेरे धोखों मैं,
उस इंसान को रौशनी मैं लाने कि ये कोश...
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Rahul Katyayan
India
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[25 Oct 2009 08:41 AM]



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