लेट्स स्माइल……

मेरे विचार, मेरी कवितायें आफ़िस से बाहर आता हू…….सर उठाकर खुले आसमान को जी भरकर देखता हू……बारिश की कुछ बूदे गालो पर गिरती है, कुछ आखो पर और पलके बन्द हो जाती है…फ़ार्मल्स के गीले होने की कोइ चिन्ता नही है…आज मै खुश हू…बहुत दिनो के बाद… रिक्शा वाला देखता है, मै पैदल ही चलता हू……... [पूरी पोस्ट]
writer Pankaj Upadhyay
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[01 Nov 2009 09:48 AM]

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