सम रैन्ड्म थिन्ग!!

मेरे विचार, मेरी कवितायें आफ़िस की मोनोटोनस और उबाऊ ज़िन्दगी से त्रस्त आकर एक लम्बी छुट्टी पर घर गया था..वो ज़िन्दगी देखने जिसने यहा तक पहुचाया है.. वो टेरेस जिसपर टहलते हुए मै अपने आप से बात करता था..वो सारी बाते… जो मै किसी से नही कर पाता था……मैने ईश्वर को हमेशा अपने पास मुझसे... [पूरी पोस्ट]
writer Pankaj Upadhyay
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[05 Oct 2009 11:46 AM]

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