काफ़ी विद मी…

मेरे विचार, मेरी कवितायें चाहता हू एक दिन अपने साथ बैठू, एक काफ़ी हो और हम दोनो ढेर सारी बाते करे, हसे, खिलखिलाये …. एक दूसरे को और जाने… मै उससे पूछू कि वो इतना गम्भीर क्यू है? और बताऊ कि क्या मजबूरिया है मेरी, जो मै उससे मिल नही पाता…. उससे पूछू कि क्यू उसने मुझे तन्हा छोड द... [पूरी पोस्ट]
writer Pankaj Upadhyay
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[05 Oct 2009 11:38 AM]

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