सिगरेट..
सिगरेट के धुये मे, कुछ शक्ले दिखती है, मुझसे बाते करती हुयी, कुछ चुप चाप..... और सिगरेट जलती जाती है... जैसे वक्त जल रहा हो, गये वक्त को मै, ऎश की तरह झाड देता हू और वो माटी के साथ मिल जाता है, खो जाता है उसी मे कही...... बस होठो पर एक...
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Pankaj Upadhyay
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[07 Oct 2009 15:35 PM]



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