कागज़ की नाव थी, समन्दर मे बहाते रहे…….
सुबीर जी ने अभी दिवाली के मौके पर एक मुशायरे का आयोजन किया था जिस मे मै देर मे अपनी रचना भेज पाया। उनके ब्लाग से ही पढा कि उनका स्वास्थ्य ठीक नही है। काश वो जल्दी से ठीक हो और हमारे जैसे लोगो का मार्गदर्शन ऎसे ही करते है॥ ये आपके लिये सर!!! “द...
[पूरी पोस्ट]
Pankaj Upadhyay
9
0
0
0
0
[22 Oct 2009 16:02 PM]



Shuffle








