स्मृति गीत: संजीव 'सलिल'
स्मृति गीत: संजीव 'सलिल' सृजन विरासत तुमसे पाई... * अलस सवेरे उठते ही तुम, बिन आलस्य काम में जुटतीं. सिगडी, सनसी, चिमटा, चमचा चौके में वाद्यों सी बजतीं. देर हुई तो हमें जगाने टेर-टेर आवाज़ लगाई. सृजन विरासत तुमसे पाई... * जेल निरीक्षण कर आते थे, नित...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
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[03 Nov 2009 11:11 AM]



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