सब त्रिया-चरित्र है !
जीवन के रंगमंच पर माँ,बहन,बेटी,पत्नी, देवरानी,जिठानी,बहू,सास,नन्द जैसे चरित्रों को संजीदगी से निभाते-निभाते एक दिन आँख भर आई मेरी इन सारे चरित्रों के बीच अपने "स्व" के कहीं खो जाने पर. मन की इस व्यथा पर कुछ बोलना चाहा होठों ने किंतु शब्द मौन हो गए ले...
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Meenu Khare
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[03 Nov 2009 10:03 AM]



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