आंधियों में दिया जलाऊंगा

QALAM E SHAIR आंधियों में दिया जलाऊंगा मैं हवाओं को आजमाऊंगा इतना प्यासा हूँ ऐसा लगता है इक समन्दर तो पी ही जाऊंगा अपनी क़िस्मत संवार लूँ पहले फ़िर तेरी ज़ुल्फ़ को सजाऊंगा आंसुओं का बनाऊंगा दरिया और फ़िर उस में डूब जाऊंगा उस को खुश देखने की चाहत में उस के हाथों मैं हार... [पूरी पोस्ट]
writer जतिन्दर परवाज़
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[03 Nov 2009 08:52 AM]

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