श्रीमद्भागवद्गीता से .........................

एक प्रयास श्रीमद्भागवद्गीता के १२ वे अध्याय के १५ वे श्लोक की बहुत ही सुंदर व्याख्या स्वामी रामसुखदास जी ने की है कि भक्त कैसा होता है और कैसा भक्त भगवान को प्रिय है। श्लोक जिससे किसी प्राणी को उद्वेग नही होता और जिसको ख़ुद भी किसी प्राणी से उद्वेग नही होता तथ... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[03 Nov 2009 06:25 AM]

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