स्त्री-पुरुष और घरेलू हिंसा

The Power of Truth नीरज नैयर हिंसा की कोई शक्ल नहीं होती, लेकिन हिंसा करने वाले की सूरत को कागज पर जरूर उकेरा जा सकता है. आदिकाल में जब मनुष्य भोजन की तलाश में जंगलों की खाक छाना करता था हिंसा तब भी मौजूद थी. उन निरीह जानवरों के लिए जो किसी का पेट भरने की खातिर मारे जा... [पूरी पोस्ट]
writer Neeraj Nayyar
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[03 Nov 2009 04:21 AM]

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