ढोने की मज़बूरी
ढोने की मज़बूरी होती है तभी तो लोग ढोते है. जैसे की मध्य प्रदेश की गरीब, दलित जनता आज भी अमीर लोगो के मल ढोने को मजबूर है. पिछले दिनों यह समाचार झारखण्ड (रांची) के एक अखबार में छपी. एक पाठक ने टिप्पणी की 'ठीके कहे हम भी इ सरकार को ढोने को मजबूर...
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raushankumar
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[03 Nov 2009 03:56 AM]



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