राज्य की नैतिकता और तमाम उलझे सवाल

निर्मल-आनन्द माओवादियों की नीति और हिंसा के खिलाफ़ लिखे मेरे पिछले लेख को कुछ पाठकों ने उसे आदिवासियों के अधिकारों के खिलाफ़ भी समझ लिया। और यह भी समझ लिया कि मैं राज्य की हर उलटी-सीधी हिंसा और अन्याय का समर्थक हूँ। शायद लेख के शीर्षक से ऐसा बोध हुआ है। ऐसा नहीं है... [पूरी पोस्ट]
writer अभय तिवारी

आदिवासी

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[03 Nov 2009 02:02 AM]

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