कितना जानता है एक शहर हमें और हम शहर को – 2
जिदंगी और अनुभवों की दुनिया में एक लंबा अरसा गुजार लेने के बाद अपने उस शहर को देखना, जिसने आपका बुनियादी संस्कार और मानस गढ़ा हो, जिसने दिमाग और हिम्मत के शुरुआती तेवर से लेकर बिजबिजाती हुई भावुकता तक से नवाजा हो, उस शहर को हम किस निगाह से देखेंगे...
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मनीषा पांडे
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[03 Nov 2009 01:05 AM]



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