इ भाई-दूज...
इ भाई-दूज दीपावली के त्यौहार पर अब वो उल्लास नजर नहीं आता .लोग मनाते है पर एकाकी से . कहीं कहीं परिवारों ,मोहल्लो में सामूहिक दिपावली मिलन होते हैं परंतु वे सब साथ रहकर भी अलग अलग से प्रतीत होते हैं डी.बड़ों को धोक देना भी महज एक औपचारिकता सी रह गई ह...
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Salil Datey
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[02 Nov 2009 21:37 PM]



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