सपनों का, 'स्टेयरकेस'

मन उवाच..... संघर्ष, ज़िंदगी की आपाधापी के बीच जीने की जद्दोज़हद और किलस के बीच लाचारी में जब इच्छाओं का दम घोंटना पड़े जब अभाव खाली आंतों में गुड़क-गुड़क बोले जब बोझिल मन किसी नाबदान की पुलिया पर बैठा दे जब एक प्याला चाय दिन भर की भूख सुड़क ले आंखों से बहते कीचड... [पूरी पोस्ट]
writer मधुकर राजपूत
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[02 Nov 2009 21:28 PM]

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