जीवन : ४५ सीखें

स्वर - चित्रदीर्घा जीवन  :  ४५ सीखें  जीवन के सभी के अपने अपने ढंग होते हैं, अपने-अपने आग्रह और अपनी-अपनी परिस्थितियाँ|  इन सबके बीच जीवन की धार  रस्ता बनी किसी तरह आगे बढ़ती है| अब पता नहीं आगे बढ़ती है या नहीं किन्तु बढ़ने को शापित  तो होत... [पूरी पोस्ट]
writer कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
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[02 Nov 2009 21:13 PM]

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