चाणक्य नीति-कुछ पुरुषों में भी विवेक नहीं होता (purush aur vivek-chankya niti)

दीपक भारतदीप की अंतर्जाल पत्रिका मातृवत् परदारांश्चय परद्रव्याणि लोष्ठवत्। आत्मवत् सर्वभूतानि यः पश्यति स नरः।। हिंदी में भावार्थ- दूसरों की पत्नी को माता तथा धन को मिट्टी के ढेले की भांति समझना चाहिये। इस संसार में वह यथार्थ रूप से मनुष्य है जो सारे प्राणियों को अपनी आत्मा की भांति... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

dharm

views
19
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[02 Nov 2009 18:54 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix