चाणक्य नीति-कुछ पुरुषों में भी विवेक नहीं होता (purush aur vivek-chankya niti)
मातृवत् परदारांश्चय परद्रव्याणि लोष्ठवत्। आत्मवत् सर्वभूतानि यः पश्यति स नरः।। हिंदी में भावार्थ- दूसरों की पत्नी को माता तथा धन को मिट्टी के ढेले की भांति समझना चाहिये। इस संसार में वह यथार्थ रूप से मनुष्य है जो सारे प्राणियों को अपनी आत्मा की भांति...
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दीपक भारतदीप
dharm
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[02 Nov 2009 18:54 PM]



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