बस गया वो आखिरी सदमा नज़र मे...!
आदाब अर्ज़ है... एक ताज़ा ग़ज़ल को रमाल बहर मे अपनी जानिब से अदा कर रहा हूँ,.. . शुरुवात अपनी इल्लत से मजबूर ख्याल से ही करूँगा... ------------ ख्याल :- ------------ यादों ने फिर आज मुझे घेरा है ... उस कोने मे मेरा बसेरा है... जहाँ तू आया नहीं कभी .....
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Kunaal
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[02 Nov 2009 17:59 PM]



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