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तुलसीदास जी ने रामचरितमानस (बालकाण्ड) में कहा है: रहति न प्रभु चित चूक किए की। करत सुरति सय बार हिए की।। जेहि अघ बधेउ ब्याध इव बाली। फिरि सुकंठ सोइ कीन्हि कुचाली।। सोइ करतूति बिभीषन केरी। सपनेहुँ सो न राम हिय हेरी।। प्रभु के चित्त में भक्त के द्वारा...
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Laxmi N. Gupta
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[02 Nov 2009 09:50 AM]



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