चाटे-काटे स्वान के, दुहूं भान्ती विपरीत .........
ब्लाग दोहावली:- रहिमन लाख भली करौ, इनका जिद्द न जाए राग सुनत, पय पियतहू, सांप सहजहि घर खाए ।। हर पोस्ट में गारी मिलत हैं, भाई लोग चिल्लाहिं रहिमन करूए लिखन कौ, चहियत यही सजाहिं ।। आप न काहू काम के, डार,पात,फल मूर औरन को रोकत फिरैं, आपहूं वृ्क्ष बबूर...
[पूरी पोस्ट]
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
46
7
0
7
6
[02 Nov 2009 09:38 AM]



Shuffle








