कलयुग में ईश्वर की वन्दना
हे प्रभु आनन्दमय हमको यही उपहार दो, सिर्फ मैं जीवित रहूँ, तुम और सबको मार दो। भक्त हूँ मैं अपका अर्जी प्रभु सुन लीजिए, और जितनी अर्जियाँॅ हो फाड उनको दीजिए। सी डी लगाकर मैं प्रभु भजन आपके कर रहा, ब्रत भी हूँ आजकल केवल फलों से पेट भर रहा। पुष्प, चन्दन...
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Nirbhay Jain
प्रवीन अग्रवाल
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[02 Nov 2009 05:44 AM]



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